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Not giving Hindi language preference is our biggest mistake-हिंदी को वरीयता ना देना हमारी सबसे बड़ी भूल

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हिंदी को वरीयता ना देना हमारी सबसे बड़ी भूल

हिंदी का विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होना चाहिए यह तभी हो पाएगा जब हम पूरी तरह से हिंदी का उपयोग करेंगे !  मगर आलम तो यह है कि हम अभी हिंदी को पूरी तरह से राष्ट्रीय स्तर पर ही लागू नहीं कर पाए हैं इसका एक बहुत बड़ा मुख्य कारण है कि हम भारतवासी हिंदी को कुछ समझते ही नहीं है जो व्यक्ति हिंदी बोलता है उसे एक साधारण इंसान समझ लिया जाता है चाहे वह कितना ही पढ़ा लिखा ज्ञानी व्यक्ति क्यों ना हो और वहीं दूसरी तरफ इंग्लिश बोलने वाले को उत्तम माना जाता है उसे विशेषता दी जाती है उसका सम्मान किया जाता है और उसे पढ़ा-लिखा और समझदार व्यक्ति समझा जाता है यही हमारी सबसे बड़ी भूल है मैं इसी के बारे में आज बात करने जा रहा हूं ।
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हिंदी भाषा के लिए गलतफहमी


हमारे दिमाग में इंग्लिश इस तरह से बढ़ चुकी है कि हम अब अपने बच्चों को भी सिर्फ और सिर्फ इंग्लिश मीडियम स्कूल में ही पढ़ाना चाहते हैं ताकि वह इंग्लिश बोलना शुरू से सिख सके है और इसमें हम अपनी इज्जत महसूस करते हैं कि हमारा बेटा अंग्रेजी में बात करेगा तो उसे सब अच्छा समझेंगे और अंग्रेजी पड़ेगा तो वह अच्छी पढ़ाई करेगा ऐसा नहीं है दोस्तों यह गलत धारणा है हमें हिंदी का प्रोत्साहन करना चाहिए और अपने बच्चों को अधिक से अधिक हिंदी पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए आज हिंदी मीडियम स्कूलों की हालत बहुत ही खस्ता हो चुकी है इसका एक सबसे बड़ा मुख्य कारण यही है कि हम अपने बच्चों को हिंदी मीडियम स्कूलों में पढ़ाना ही नहीं चाहते हम यह समझते हैं कि हिंदी माध्यम में पढ़कर बच्चा कुछ नहीं कर पाएगा वह आगे नहीं बढ़ पाएगा लेकिन ज़रा आप सोचिए कि जो हमारे दिनचर्या की भाषा है बच्चा अगर उस भाषा में पड़ेगा तो ज्यादा समझेगा या फिर उस भाषा में जिसे हम आज तक  हउआ ही समझ रहे हैं
उम्मीद है आपको बात समझ में आ गई होगी हम सिर्फ अपने दिल को तसल्ली दे रहे हैं और कुछ नहीं," क्योंकि ज्ञान वह बेहतर होता है जो समझ में आए और समझाया जा सके बांटा जा सके ज्ञान वह बेहतर नहीं होता जो कि सिर्फ अपने पास ही रख लिया जाए और उसे दिखावे के लिए प्रयोग किया जाए"।
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 हिंदी भाषा का तिरस्कार ना करें

हम भारतवासियों में एक बहुत बड़ी कमी है कि हम आज तक हिंदी को ही नकारते रहे हैं जो कि  हमारे देश की प्रमुख भाषा है हमें इसका सम्मान करना चाहिए उल्टा हम इसका तिरस्कार करते हैं आप कहेंगे कि यह कैसे दोस्तों यह ऐसे की हम हिंदी बोलने वाले को  एक साधारण इंसान समझ के उसकी बातों पर ध्यान नहीं देते और वहीं दूसरी तरफ यदि कोई व्यक्ति अंग्रेजी में बात करता है तो सबका ध्यान  उस तरफ चला जाता है और उसे विशेष व्यक्ति समझ लिया जाता है क्योंकि उसे अंग्रेजी आती है अंग्रेजी आज हमारे देश में एक कोढ़ की  बीमारी की तरह फैल चुकी है और इस गलतफहमी के साथ कि जिस व्यक्ति को अंग्रेजी आती है वही पढ़ा-लिखा और सभ्य हैं और जिसे अंग्रेजी नहीं आती उसे गंवार और कम पढ़ा लिखा समझ लिया जाता है ऐसा नहीं है यह धरना बिल्कुल ही गलत है हमें अपने देश की भाषा हिंदी को विशेष दर्जा देना चाहिए उसे ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

हिंदी भाषा को प्राथमिकता देना मुख्य लक्ष्य

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चाइना और जापान जैसे विकसित देश अंग्रेजी का प्रयोग बहुत ही कम करते हैं सिर्फ नाम मात्र उन्हें अंग्रेजी नहीं आती मगर फिर भी वह इतना आगे हैं हम से कहीं अधिक आगे और विश्व में एक रूतबा रखने वाले व्यक्ति हैं , उन्हें इतनी भी अंग्रेजी नहीं आती कि वह आपस में किसी से अंग्रेजी में बात कर सके मगर फिर भी वह पूरे विश्व में छाए हुए हैं इसका एक कारण है कि वह अपने देश की भाषा को प्राथमिकता देते हैं और उसे ही बोलचाल और लेखन में प्रयोग करते हैं वहां की राष्ट्रीय भाषा और राज्य भाषा भी उनकी अपनी ही भाषा चाइनीज और जापानी ही है इसके बावजूद वह सभी देश बहुत आगे हैं हमसे कहीं आगे मगर हमें यह नहीं समझ में आता हमें तो बस यह समझ में आता है कि अंग्रेजी बोलने वाला व्यक्ति ही सभ्य है पढ़ा लिखा है ज्ञानी है, वहीं अमेरिका में भी वहां की अपनी भाषा इंग्लिश का प्रयोग होता है और किसी भाषा का प्रयोग नहीं होता, मगर हम उन अंग्रेजों की दी गई भाषा का प्रयोग करके गर्व महसूस करते हैं ऐसा क्यों है हमें अपने देश की भाषा को प्रयोग करने में गर्व महसूस करना चाहिए ना कि उस भाषा को जिस भाषा में हमारे ऊपर 200 सालों तक शासन किया ।

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मैं आपसे दो लाइनों के जरिए कुछ कहना चाहूंगा
" न जाने क्या था उन अंग्रेजों की अंग्रेजी में,
के अंग्रेज तो चले गए मगर अंग्रेजी नहीं गई "


हिंदी भाषा का प्रयोग करना अत्यधिक जरूरी

माना की अंग्रेजी एक अंतरराष्ट्रीय भाषा है और वह भाषा सबको बोलनी आनी चाहिए मैं इसका विरोध नहीं करता हूं मगर हमें अपने देश की भाषा हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए और उसे प्रयोग करने में गर्व महसूस करना चाहिए ना कि दिखावे के लिए जगह जगह पर लोगों के सामने इंग्लिश बोल बोल कर अपने आप को यह समझना चाहिए कि हम पढ़े-लिखे और सभ्य हैं यह गलत धारणा है ये सिर्फ आपकी बात नहीं करता मैं अपनी आपकी सबकी बातें कर रहा हूं ।

पंडित मदन मोहन मालवीय का हिंदी मान्यता के लिए लड़ना

सोचिए दोस्तों  उन लोगों के बारे में बारे में जिन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया तब जाकर हिंदी को मान्यता मिली पंडित मदन मोहन मालवीय ने  पश्चिमोत्तर प्रदेश में  हिंदी को  शासन की भाषा बनाने के लिए  बहुत मेहनत करी  और  अवध के गवर्नर सर एनटिनी  मैकडोनाल्ड  के सन्मुख 1898 ईसवी में विविध प्रमाण प्रस्तुत करके  कचहरी में  हिंदी भाषा का प्रयोग शुरू कराया ।
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सन 1910 में हिंदी साहित्य सम्मेलन में पंडित मदन मोहन मालवीय ने यह कहा कि "जैसे हिंदी भाषा को फारसी अरबी के बड़े बड़े शब्दों से लादना जैसे बुरा है और वैसे ही संस्कृत के अकारण शब्दों से गूँथना भी अच्छा नही " और कहा कि 1 दिन यही भाषा हमारी राष्ट्रीय भाषा होगी ।

 हिंदी भाषा की ताकत समझना जरूरी

हम उसी भाषा का इतना अपमान करते हैं दोस्तों यह अपमान करना ही तो हुआ कि हम अपनी भाषा को प्राथमिकता नहीं देते हैं। हम अंग्रेजी की तरफ भागते हैं।अंग्रेजी को ही सब कुछ समझते हैं। अंग्रेजी बोलने वाला ही सब कुछ है। वह इंटेलिजेंट है, वही पढ़ा लिखा है, वही समझदार है। हम कब समझेंगे कि हमारे देश की भाषा की कितनी ताकत है। अगर हम सब हिंदी को बोलना शुरू करते हैं। हिंदी में पत्राचार शुरू कर दें तो, हम बहुत बड़ी शक्ति बन सकते हैं। जैसे कि चाइना जापान और अमेरिका है यह सब दोस्तों तभी संभव हो पाएगा जब हम हिंदी को प्राथमिकता देंगे हिंदी को अपने दिनचर्या में लाएंगे हिंदी भाषा में लिखेंगे पड़ेंगे और बोलेंगे।

हमें हमारे देश के महान लोगों ने बहुत बार उदाहरण दिया है कि हिंदी को कैसे प्राथमिकता दी जाए दोस्तों जब वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना को जीव विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार मिला तब उन्हें मंच पर आकर भाषण देने को कहा गया उन्होंने मंच पर जाकर सबसे पहले लोगों से हिंदी में बोलने  की आज्ञा ली और अपना भाषण हिंदी भाषा में दीया यह एक उदाहरण ही तो है  कि अपने देश की भाषा को अंतरराष्ट्रीय  स्तर पर लेकर गए और वहां अंग्रेजी भाषी लोगों के बीच में हिंदी भाषा का प्रयोग किया और भाषण दिया ।


इसके अलावा गांधीजी ने भी विदेशों में कई बार हिंदी में भाषण दिया और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने भी विदेशों में जाकर हिंदी में भाषण दिया उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विदेशों में जाकर हिंदी में भाषण देते हैं सोचिए भारत की बड़ी बड़ी शख्सियतें  अगर हिंदी बोल कर अपने आप को गर्वित महसूस करते हैं तो क्या हम और आप हिंदी नहीं बोल सकते और आप हिंदी बोल कर अपने आप को गर्वित नहीं महसूस कर सकते हैं हम यह क्यों सोचते हैं कि हम हिंदी बोलेंगे तो हमारा स्तर गिर जाएगा हमें लोग अनपढ़ गंवार समझेंगे ऐसा नहीं है दोस्तों यह एक राष्ट्र की भाषा है और एक ऐसे राष्ट्र की भाषा है जो कि पूरे विश्व में अपनी सभ्यता के लिए माना जाता है और हम उसी सभ्य देश के व्यक्ति हैं जिनकी भाषा हिंदी एक महान भाषा है और उसका सम्मान हमें हमेशा करते रहना चाहिए और हिंदी का विकास उत्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो सके, यह सब तभी हो पाएगा जब हम हिंदी भाषा को अपने जीवन का एक मुख्य अंग बना लेंगे और उसे बोलने में हम अपने आपको को गर्वित महसूस करेंगे ना कि अपने आपको छोटा समझेंगे ।
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 हिंदी भाषा को जीवन का अभिन्न अंग बनाएं

हिंदी को अपने जीवन का अभिन्न अंग समझते हुए हिंदी में बोलेंगे बात करेंगे पत्राचार करेंगे लिखेंगे और पढ़ेंगे यह प्रण करके हम हिंदी का सही मायने में विकास कर सकते हैं आइए हम हिंदी को अपने राष्ट्र की  महान भाषा बनाएं और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाएं यह तभी संभव हो पाएगा जब हम हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग करेंगे और  इसके उपयोग से  कतराएंगे नहीं और अंग्रेजी बोलने का दिखावा तो बिल्कुल ही नहीं करेंगे।


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धन्यवाद  अनूप कुमार

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